समिति की संगठना और स्थापना

वर्ष 1963 में राजभाषा अधिनियम अधिनियमित किया गया। अधिनियम में अन्य बातों के साथ-साथ यह भी प्रावधान था कि संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए हिंदी के प्रयोग में हुई प्रगति का पुनर्विलोकन करने के लिए संसद की एक समिति गठित की जाए । राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा (3) के प्रख्यापन के दस वर्ष बाद इस समिति का गठन किया जाना था । इस समिति को संसदीय राजभाषा समिति का नाम दिया गया तथा अधिनियम की धारा 4 (1)के तहत वर्ष 1976 में समिति का गठन किया गया । समिति में संसद केकुल 30 सदस्यों में से 20 लोकसभा से तथा 10 राज्यसभा से होते हैं। हर बार लोकसभा चुनावों के बाद समिति का पुनर्गठन किया जाता है तथा इस क्रम में अब तक क्रमश: वर्ष 1977, 1980, 1984, 1989, 1991, 1996, 1998, 1999,2004,2009 तथा 2014 के लोकसभा चुनावों के पश्चात् समिति का पुनर्गठन हो चुका है। समिति के कार्यकलाप और गतिविधियां मुख्यत: राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 4 के प्रावधानों के अनुरूप हैं।

संपूर्ण समिति को तीन उप समितियों में बांटा गया है तथा प्रत्येक उप समिति के अलग-अलग संयोजक और सदस्यगण होते हैं। इसी प्रकार एक आलेख एवं साक्ष्य समिति गठित है, जिसमें तीनों उप-समितियों के संयोजक एवं कुछ चुने हुए सदस्यगण होते हैं।

उद्देश्य एवं लक्ष्य
संसदीय राजभाषा समिति द्वारा संसद के प्रत्येक सत्रावसान के दौरान राजभाषा अधिनियम के प्रावधानों की परिधि में आने वाले मंत्रालयों,विभागों, अधीनस्थ कार्यालयों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों,बैंकों आदि का निरीक्षण किया जाता है। प्रत्येक सत्रावसान में तीनों उप समितियों द्वारा उपर्युक्त कार्यालयों आदि के निरीक्षण करने का लक्ष्य होता है।

प्रत्येक वित्तीय वर्ष के दौरान आलेख एवं साक्ष्य उपसमिति द्वारा देश भर में गठित नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियों के अध्यक्षों तथा उनके सदस्य कार्यालयों के कार्यालय अध्यक्षों के साथ विचार-विमर्श कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय उपसमितियों के माननीय संयोजकों के निदेशानुसार तीनों उप-समितियों के निरीक्षण एवं दौरा कार्यक्रमों का निर्धारण किया जाता है। पूर्व में किए गए निरीक्षण दौरों से संबंधित रिपोर्ट बनाना एवं निरीक्षण के दौरान कार्यालय प्रमुख द्वारा संबंधित उप समिति को दिए गए आश्वासनों की अनुपालना हेतु अनुवर्ती कार्रवाई सुनिश्चित करवाना होता है।

संसदीय राजभाषा समिति द्वारा केंद्र सरकार एवं इसके नियंत्रणाधीन उपक्रमों, निकायों, राष्ट्रीयकृत बैंकों आदि के निरीक्षण के आधार पर हिंदी के प्रगामी प्रयोग में हुई प्रगति के पुनरावलोकन के उपरांत उत्तरोत्तर प्रगति हेतु महामहिम राष्ट्रपति महोदय को अपनी सिफारिशें प्रस्तुत की जाती हैं। ये सिफारिशें पिछले 5 वर्षों में किए गए निरीक्षणों के दौरान देखी गई उपलब्धियों आदि के निष्कर्षों पर आधारित होता है।