राजभाषा विभाग

Department of Official Language
गृह मंत्रालय, भारत सरकार

 प्रसिद्ध लघु कहानियाँ
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+ पंचतंत्र की कहानियाँ
- डॉ दिनेश चमोला
   नाग का उपकार
   प्रेम का प्रतिदान
   चोर की दाढ़ी में तिनका
   उपकार का बदला
   गोमती का उपकार
   करनी का फल
   बूढ़ा पीपल और मोहिनी
   चूहे जी का चमत्‍कार
   चम्‍पा का राजकुमार
+  डॉ प्रियंका सारस्वत(संपादक)
गोमती का उपकार

गोमती नदी के किनारे एक हरा-भरा चरागाह था । वर्षा ऋतु के बाद कई चरवाहे वहां अपने पशुओं सहित पहुंच जाते । चरागाह दूर-दूर तक फैला हुआ था । पशु प्रतिदिन जितनी घास चरते दूसरे दिन वह उतनी ही और बढ़ जाती । कुछ दूर हिरण-शावकों का एक विशाल झुंड रहता था । वह प्रतिदिन घास चरने वहां आया करता था । उन्हें गोमती से अत्यंत स्नेह था । बच्चे गोमती की लहरों को देख-देख झूमते रहते तो हिरण-शावकों के माता-पिता चारे की खोज में दूर जंगल में निकल पड़ते । एक दिन बसन्ती नीलगाय ने हिरण-शावकों के मुखिया से कहा-

`भैया, अब गोमती का चरागाह खतरे से बाहर नही ! अब अपने नन्हे हिरण-शावकों को वहां न भेजा करो । वहां कई शिकारी अपने शिकार की खोज में आते हैं ।`

बसन्ती की दयालुता से मुखिया बहुत प्रभावित हुआ । उसने प्रेम से बसन्ती से पूछा-

`बहन, अब इस खुले मैदान को छोड़कर हमें कहां जाना चाहि? इस गोमती के किनारे खेलते-खेलते हमारी कई पीढ़ियां बीत गई हैं ।`

`नीलू भा! नन्दन वन में मेरी सहेली हेमा हिरणी का बहुत बड़ा अहाता है । मैं वहां आप सबके लिए व्यवस्था करवा दूंगी । वहां कई हिरण-परिवार सुखी से जीवन बिता रहे हैं । नीचे हरी-हरी सुन्दर घास, ऊपर बरगद की शीतल छांव । वहां न शिकारियों का भय है न कल की चिन्ता । ` बसन्ती ने धैर्य बंधाते हुए कहा ।

गोमती के किनारे शेरू नामक एक हिंसक शेर रहता था । उसके आतंक से पूरे जंगल के जीव दुखी थे । भीमू लोमड़ी से उसकी गहरी मित्रता थी । भीमू लोमड़ी धोखाधड़ी से उसके शिकार की व्यवस्था करती, बदले में उससे कई लाभ लेती । वह हिंसक शेरू की सहायक थी । एक दिन भीमू घूमती हुई गोमती के चरागाह में पहुंची । उसने हिरण-शावकों को पास बुलाकर प्रेम से कहा-

`भाइयो! मुझे तुम्हारे जाने का दुःख है । मैं भी कई सालों से इसी गोमती के किनारे रहती हूं । मेरे व तुम्हारे पूर्वजों का गहरा सम्बन्ध था । सोचा तुम्हारे दुःख में मैं भी क्यों न हाथ बंटा लूं । मेरे आवास के पीछे बहुत सुन्दर चरागाह है । वहां एक संकट गुफा भी है जहां संकट पड़ने पर छुपा जा सकता है । और मैं भी तो आप लोगों से बाहर नहीं हूं ।`

पूरे हिरण-परिवार को भीमू की बात पर पूरा विश्वास हो गया । भीमू के बहकाने पर हिरण-शावक खुशी से वहां रहने लगे ।

वहां भी गोमती का पूरा आश्रय था । गोमती का पानी ढलाना होने के कारण वहां तेजी से बहता था । हिरण-परिवार को गोमती के किनारे जाने पर आत्मसंतोष था, क्योंकि पीढ़ियों से उनके पूर्वज भी गोमती की छत्रछाया में फल-फूल रहे थे ।

इधर हिंसक शेरू का मुंह हमेशा उन्हें देख पानी से भरा रहता । सोचता रहता कि बिना प्रयास किए ही कई दिनों का पूर्ण आहार उसे प्राप्त हो गया है । वह सुख की नींद सोया रहता । मुखिया हिरण प्रातः ही गोमती के शीतल जल में स्नान करने जाता । एक दिन जब वह स्नान कर सूर्य देव को नमस्कार कर रहा था तो एकाएक गोमती प्रकट हुई। गोमती हिरण परिवार पर पूरी तरह दयार्द्र थी । गोमती ने स्नेह से हिरण मुखिया से कहा

` बेटा, यह स्थान तुम्हारे लिए संकटमय है । सचेत रहना । फिर भी कभी संकट आए तो मेरे किनारे आकर मुझे याद करना ।` यह कहकर गोमती लोप हो गई ।

हिरण मुखिया को यह सब देख बहुत आश्चर्य हुआ । जब उसने यह कहानी अपने परिवार को बतायी तो वह बहुत भयभीत हुए । अब वे गोमती के किनारे की गुफाओं में रहते ।

बरसात आई तो गोमती का किनारा हरियाली से खिलखिला उठा । हिरण शावक कभी देर तक सोए रहते तो गोमती अपनी शीतल लहरों से उन्हें जगा देती । गोमती को हिरण शावकों का अपने पानी में फुदकना बहुत अच्छा लगता था । कभी-कभी वह उन्हें अपने दूसरे किनारे भेजने के लिए अपना पूरा पानी सोख लेती ।

हिंसक शेरू शिकार करने का अवसर देखता रहता । एक दिन जब वह जोर से दहाड़ा तो हिरण शावक घबराकर गोमती के पास पहुंचे । बड़े हिरण चारे की तलाश में दूर निकल गए थे । मौका पाकर वह उनका पीछा करने लगा । हिरण शावक चीखते-चिल्लाते गोमती में कूद पड़े । दयालु गोमती ने अपना पानी सोख लिया । हिंसक शेरू भी गोमती को सूखा देख उनके पीछे कूद पड़ा । तभी गोमती ने उग्र रूप धारण कर लिया और हिंसक शेरू को अपने प्रवाह में डूबो दिया । उदार गोमती अपना उपकार पूरा कर चुकी थी । हिंसक शेरू निर्जीव हो औंधे मुंह गिरा पड़ा था । दरअसल सच्चा विश्वास ही संकट में रक्षा करता है।

 

(स्वर : श्री सतेंद्र दहिया )
    

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