राजभाषा विभाग

Department of Official Language
गृह मंत्रालय, भारत सरकार

 प्रसिद्ध लघु कहानियाँ
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- डॉ दिनेश चमोला
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   प्रेम का प्रतिदान
   चोर की दाढ़ी में तिनका
   उपकार का बदला
   गोमती का उपकार
   करनी का फल
   बूढ़ा पीपल और मोहिनी
   चूहे जी का चमत्‍कार
   चम्‍पा का राजकुमार
+  डॉ प्रियंका सारस्वत(संपादक)
बूढ़ा पीपल और मोहिनी

राजू का एक छोटा सा गांव था । उससे कुछ दूर एक पीपल का बड़ा और पुराना पेड़ था। उसकी जड़ें दूर-दूर तक फैली हुई थीं । शाखाओं ने जमीन का बहुत-सा स्‍थान घेर रखा था । पतझड़ के दिनों में बूढ़ा पीपल पत्‍तों से ढक जाता तो एक बूढ़ा प्रेत सा लगता, जबकि वसन्‍त के आने पर पीपल एक नई-नवेली दुल्‍हन सा खिल उठता । बच्‍चों का भारी-भरकम समूह पीपल की छांव में खेलता रहता । रोज ही देर सांझ तक वहां बच्‍चों का मेला लगा रहता । जैसे ही सूरज छिपने लगता बच्‍चे घरों को लौट जाते । पक्षियों के कई कबीले भी इस पेड़ पर रहते थे । बूढ़ा पीपल सभी की आंखों का तारा था । सुबह जैसे ही सूरज कुछ ऊपर चढ़ जाता तो वहां एक गड़रिया आता । उसका नाम था मोहिनी । उसके पास भेड़ों का भारी समूह था, जिन्‍हें वह पास के जंगल में हांक देता और स्‍वयं सुस्‍ताने पीपल की छांव में आ जाता ।

मोहिनी बूढ़ा था, परंतु उतना नहीं जितना कि पीपल । मोहिनी पीपल के पास जाता तो बच्‍चे कतारों में बैठ जाते । मोहिनी की दाढ़ी भी बहुत लम्‍बी थी, पीपल की जड़ों सी । बच्‍चे मोहिनी को बूढ़ा दादा पीपल वाला कहकर पुकारते थे । कभी-कभी जब मोहिनी को फुरसत मिलती तो पीपल के तने के सहारे बैठ जाता । कभी गीत सुनाता तो कभी जी भर कहानियां ।

बूढ़े मोहिनी के पास एक जादुई बांसुरी थी । जब वह उसको बजाता तो झूमने लगता । जिस डाल या स्‍थान पर वह बैठता तो वह भी जादुई बन जाता । तब जो भी उसे छू लेता, वह स्‍वयं ही नाचने लग जाता ।

एक दिन मोहिनी ने बच्‍चों से कहा - `बच्‍चों ! आज मैं तुम्‍हारे सामने इस पीपल के सभी जीव-जंतुओं को नचाउँगा ।`

बच्‍चे उत्‍सुकता से देख रहे थे । मोहिनी की ऊपर वाली डाल पर एक मोटा सा बन्‍दर था। बांसुरी बजाते ही मोहिनी ने उस शाखा को छुआ तो बन्‍दर धड़ाम से नीचे आ गया । बन्‍दर ने बूढ़े मोहिनी की लाठी उठाई और नाचने लगा । जब बन्‍दर भागने लगा तो मोहिनी ने उसे बांसुरी से छुआ और वह बैठ गया । दूसरे दिन मोहिनी ने पूरे पीपल को छुआ तो सभी पक्षी नाचने लगे। सबसे आगे मोर था, उसके पीछे सारे पक्षी ।

राजू ने एक दिन यह सब अपने स्‍कूल के प्रधानाध्‍यापक को बताया । उन्‍हें उसके कहने पर विश्‍वास नहीं हुआ । वे देखने आए तो देखा कि बूढ़ा मोहिनी बांसुरी बजा रहा है और बहुत से बच्‍चे नाच रहे हैं । वे बहुत हैरान हुए ।

राजू के स्‍कूल में कल से गर्मियों की छुट्टियां शुरु थीं । राजू ने मोहिनी दादा से कहा-`दादा जी, अब हमारी छुट्टियां हैं । अब से हम रोज सुबह से शाम आपके साथ ही रहेंगे ।`

दादा ने प्रेम से कहा- `नहीं, मेरे प्‍यारे बच्‍चों, अब मेरी भी छुट्टियां समाप्‍त हो गई हैं । आज शाम को एक जोर की आंधी आएगी । तुम दूर से ही मुझे नाचते देखना । तब मैं और पीपल दोनों ही यहां से चल देंगे । तुम खूब पढ़-लिख कर बड़े बनना । बूढ़े पीपल और अपने दादा को भी याद करना ।` यह कह कर मोहिनी दादा ने बांसुरी बजाई । हवा तेज बहने लगी । मोहिनी ने हाथ जोड़कर कहा - `अच्‍छा बच्‍चों ! अब हम जा रहे हैं ।` तभी धड़ाम से पीपल उखड़ कर गिरा । बच्‍चों ने चीखते हुए कहा - `मोहिनी दादा....।` सभी की आंखें नम थीं । अब न वह जादुई बांसुरी रही, न बूढ़ा पीपल और न ही बच्‍चों का मोहिनी दादा ।

(स्वर : श्री सतेंद्र दहिया )
    

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