राजभाषा विभाग

Department of Official Language
गृह मंत्रालय, भारत सरकार

 प्रसिद्ध लघु कहानियाँ
+ रविंद्रनाथ टैगोर
+ प्रेमचंद
+ जयशंकर प्रसाद
+ यशपाल
+ चंद्रधर शर्मा गुलेरी
+ सआदत हसन मंटो
+ फणीश्वरनाथ रेणु
+ निर्मल वर्मा
+ नागार्जुन
+ जैनेन्द्र कुमार
+ यशपाल
+ भीष्म साहनी
+ महीप सिंह
+ सुदर्शन
+ कृष्णा सोबती
+ सुभद्रा कुमारी चौहान
+ पंचतंत्र की कहानियाँ
+ डॉ दिनेश चमोला
-  डॉ प्रियंका सारस्वत(संपादक)
   पहले विचारो फिर करो
   राजभक्‍त राजकुमार
   लालची नाई
   लोमड़ी की चतुराई
   चालाक कौवा
   दयालु हंस
   सहायक शत्रु
   शक्‍तिशाली मेढा
   घमंडी मोर
   बुद्धिमान मंत्री
घमंडी मोर

एक घमंडी मोर जंगल में झील के किनारे रहता था वह प्रतिदिन उस झील में जाकर अपने खूबसूरत, रंगीन पंखों को खोलकर चोंच से संवारता और फिर अपना सौंदर्य झील के स्वच्छ जल में अपनी परछाईं में निहारता था अपनी परछाईं को देख कर उसे अपने सौंदर्य पर और भी घमंड होता था

एक दिन एक सारस भी उसी झील के किनारे रहने के लिए आया मोर ने सोचा, `अरे ! शायद यहां कोई नया पड़ोसी रहने के लिए आया है मुझे उसके पास जाकर अपना परिचय देना चाहिए वैसे भी नए पड़ोसी को अवश्य जानना चाहिए कि उसका पड़ोसी कितना सुंदर है।`

ऐसा सोच कर मोर मस्ती से झूमता हुआ झील के किनारे पहुंचा उस समय सारस मछली पकड़ने में व्यस्त था झील के किनारे पहुंच कर प्रतिदिन की तरह मोर अपने पंखों को फैलाकर अपनी चोंच की सहायता से संवारने लगा अपनी परछाईं को झील के पानी में देख कर उसे अपने पर घमंड हो रहा था सिर उठाकर उसने सारस की और देखा और उससे बोला, `श्रीमान सारस, नमस्कार, तो तुम मेरे नए पड़ोसी हो ! तुम्हारा यहां इस जंगल में स्वागत है `

`बहुत-बहुत धन्यवाद, श्रीमान मोर जी ` सारस ने कहा

मोर अपनी बात आगे बढ़ाते हुए बोला, `श्रीमान सारस जी, मैं यह देख कर हैरान हूं कि आप अपने इन सपाट सफेद साधारण पंखों के साथ किस प्रकार संतुष्ट रहते हैं यह देखने में बहुत ही साधारण हैं और इनसे आपकी सुंदरता में भी कोई वृद्धि नहीं होती `

सारस ने मुस्कुराकर मोर की और देखा और हवा में उड़ कर मोर के पास गया फिर वह मोर से बोला, `प्रिय मोर जी, ईश्वर ने हमें पंख इसलिए दिए हैं ताकि उनकी सहायता से हम उड़ सकें इसमें कोई शक नहीं है कि आप के पंख बहुत सुंदर हैं यह देखने में बहुत मोहक लगते हैं परंतु इनका कोई उपयोग नहीं है आवश्यकता पड़ने पर इन की सहायता से आप अधिक दूरी तक या अधिक ऊंचाई तक और अधिक समय तक नहीं उड़ सकते इसके विपरीत, मेरे पंख साधारण अवश्य हैं परंतु हैं बहुत उपयोगी I ये तुम्हारे पंखों की तरह दिखने में सुंदर तो नहीं हैं लेकिन मैं इनकी सहायता से तुमसे अधिक दूर तक, अधिक ऊंचाई तक और अधिक समय तक बिना थके उड़ सकता हूं `

सारस की इन बातों को सुन कर मोर ठगा सा रह गया वह कुछ बोल पाया और वहां से शर्मिंदा होकर वापस चला गया उस दिन के बाद से मोर ने कभी अपने पंखों पर झूठा घमंड नहीं किया

(स्वर : श्री सतेंद्र दहिया )
    

अस्वीकरण संपर्क करें सामग्री राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई है विकसित और रखरखाव : राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र (एनआईसी)
1