राजभाषा विभाग

Department of Official Language
गृह मंत्रालय, भारत सरकार

 प्रसिद्ध लघु कहानियाँ
+ रविंद्रनाथ टैगोर
+ प्रेमचंद
+ जयशंकर प्रसाद
+ यशपाल
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+ सुभद्रा कुमारी चौहान
+ पंचतंत्र की कहानियाँ
- डॉ दिनेश चमोला
   नाग का उपकार
   प्रेम का प्रतिदान
   चोर की दाढ़ी में तिनका
   उपकार का बदला
   गोमती का उपकार
   करनी का फल
   बूढ़ा पीपल और मोहिनी
   चूहे जी का चमत्‍कार
   चम्‍पा का राजकुमार
+  डॉ प्रियंका सारस्वत(संपादक)
करनी का फल

नन्दन वन में जानवरों का बहुत बड़ा समूह रहता था सभी का आपस में भाईचारा था। सबके सुख-दुख की देखभाल की जाती ऊंच-नीच का कोई भेदभाव होता हर तीसरे वर्ष चुनाव किया जाता। पशुओं के कल्याण के लिए `पशु निकेतन` नामक संस्था भी स्थापित की गई, जिसमें अपंग पशुओं का उपचार किया जाता

कालू शेर इसके अध्यक्ष थे पिंकी लोमड़ी सचिव थी और रीनू बन्दर कोषाध्यक्ष थे जब कभी विशेष बैठक होती, तो नीतू मोरनी मंच संचालन करती

कालू शेर बहुत बूढ़े हो गए थे उनके राज् में कभी जीव दुखी रहता सभी के आवासों पर जाकर सुख-दु: खान-पान की पूछताछ की जाती एक दिन अध्यक्ष कालू ने सभी वरिष् अधिकारियों की सभा बुलवाई और नम्रता से कहा - `साथियो ! अब मैं `पशु निकेतन` के अध्यक्ष पद पर कार्य करने में असमर्थ हूँ क्योंकि अब मेरा शरीर बूढ़ा हो गया है दांतों ने जवाब दे दिया है आओ, हम सब अब एक योग् शासक का चुनाव करें `

`मैं समस् सभा की ओर से पिंकी लोमड़ी का नाम अध्यक्ष पद हेतु प्रस्तुत करता हूँ ` रीनू बन्दर ने कहा

`मैं रीनू जी के प्रस्ताव का समर्थन करती हूँ ` नीतू मोरनी ने कहा

इस प्रकार सभी पदों का चुनाव हुआ बूढ़े कालू राजा के सेवानिवृत् होने पर उनके पूरे खान-पान की भी व्यवस्था की गई पिंकी लोमड़ी बहुत चालाक और चापलूस थी जब नन्दन वन की राजसत्ता उसके हाथ में गई, तो उसके पैर धरती पर पड़ते पशु निकेतन के जीवों की देखभाल और खान-पान में कमी महसूस होने लगीं पशु निकेतन का अधिकांश सामान चुपचाप ही लोमड़ी परिवार में पहुंचने लगा

दिनोंदिन जानवर भूखों मरने लगे उन्हें कालू राजा के न्यायपूर्ण शासन की याद आने लगी पिंकी लोमड़ी को यह अपना अपमान महसूस हुआ वह कालू राजा को अपने मार्ग का कांटा समझने लगी एक दिन कालू राजा की अनुपस्थिति में उसने सभी को संबोधित किया `प्यारे साथियों, आपको मालूम है आज हमारी जीव कितने दुखी हैं यह सब कालू राजा की मेहरबानी है वह जीवों को आपस में भिड़वाकर बरबाद करना चाहते हैं `

`नहीं, यह कभी नहीं हो सकता ` हिरण मुखिया ने कहा

`अरे मूर्ख! तुम्हें क्या मालूम ? गुफाओं के अंधेरे में खोए रहते हो तुम्हें दीन-दुनिया की क्या सुध ?` लोमड़ी ने झिड़कते हुए कहा

`हमें शर्म आनी चाहिए कल मैंने बूढ़े कालू को षडयंत्र रचते देखा उसने हमारा अन् करने के लिए एक दूसरी सभा तैयार कर रखी है वे सब आज ही हम सब पर धावा बोलेंगे इसलिए हमें आज ही जाकर अनका मटियामेट करना चाहिए।` गरजते हुए लोमड़ी ने कहा

सभी जीव अनमने मन से तैयार भी हो गए उसने सीधे ही कालू पर टूट पड़ने का निर्देश दिया। स्वयं चोरी-छिपे लोमड़ी कहीं भाग गई जब सभी कालू राजा के घर पहुँचे तो वहां पर एक बहुत बड़ा बोर्ड लगा हुआ था- `अपंग सहायता दल` आगे लिखा था-`पशु निकेतन में पीड़ित पशुओं के लिए रक्षा-कोष` - संचालक - कालू राजा तभी कालू जी भारी भरकम भीड़ सहित पीड़ित पशुओं के लिए सामान लेकर लंगड़ाते हुए रहे थे जब सभी पशुओं ने यह सब देखा तो उनके पैरों तले की जमीन खिसक गई

उन्होंने आव देखा ताव भागते-भागते उस चापलूस लोमड़ी को दबोच लिया उसकी खूब पिटाई कर उसे उसकी करनी का फल देकर स्वर्गलोक भेज दिया

(स्वर : श्री सतेंद्र दहिया )
    

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