राजभाषा विभाग

Department of Official Language
गृह मंत्रालय, भारत सरकार

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लोमड़ी की चतुराई

एक बार की बात है, जंगल में एक सप्ताह से बहुत तेज बारिश हो रही थी । इसलिए कोई भी जानवर अपने भोजन के लिए घर से बाहर नहीं जा सका ।

बारिश के रुकने पर सभी पशु अपने-अपने घरों से भोजन की तलाश में निकल पड़े । एक भूखी लोमड़ी भी अपने घर से बाहर भोजन की तलाश में निकली । बाहर निकल कर वह चारों ओर भटकने लगी । एक जगह उसने देखा कि एक मोटा-ताजा हिरण हरी-हरी घास खा रहा है । लोमड़ी जानती थी कि हिरण को पकड़ना आसान नहीं है । इसलिए इस कार्य के लिए उसने किसी की सहायता लेने का निश्चय किया । थोड़ी देर के बाद उसे एक चूहा दिखाई दिया । चूहे को देख कर लोमड़ी उससे बोली, `प्रिय चूहे, मुझे विश्वास है कि तुम भोजन की खोज में निकले हो ।`

`हां, आपने ठीक कहा` चूहा बोला ।

`यदि तुम उस हिरण को पकड़ने में मेरी सहायता करो तो हमें कई दिनों के लिए भोजन मिल जाएगा ।` लोमड़ी ने कहा ।

यह सुनकर चूहा लोमड़ी की सहायता करने के लिए तैयार हो गया । वे अपनी योजना पर चर्चा करने के लिए बैठे ही थे कि भेड़िया, नेवला और चीता भी वहां आ गए । भेड़िया बोला, `प्रिय लोमड़ी, भारी बारिश के कारण हम एक सप्ताह तक शिकार के लिए बाहर नहीं निकल पाए। मैंने पास में ही एक मोटा-ताजा हिरण देखा है । क्या उसे पकड़ने में तुम मेरी सहायता कर सकती हो ?`

लोमड़ी मुस्कुराते हुए बोली, `मैं और मेरा मित्र चूहा इसी विषय पर योजना बना रहे थे । अब आप भी आ गए हैं तो हमारी योजना जरुर सफल होगी ।`

लोमड़ी ने सभी को अपनी योजना सुनाई । थोड़ी देर में सभी जानवर अपने-अपने निश्चित स्थान पर योजना के अनुसार खड़े हो गए ।

योजना के अनुसार चूहा घांस में छिपता हुआ हिरण के पास गया और उसने उसके पैर में काट लिया । चूहे के काटने से घायल हिरण भागने में असमर्थ हो गया । तभी भेड़िया, लोमड़ी, चीते व नेवले ने हिरण को चारों ओर से घेर लिया । अपने आप को हिंसक पशुओं से घिरा देख कर वह भयभीत हो गया और अपने प्राणों की रक्षा के लिए भागा । परंतु पैर में घाव हो जाने के कारण वह धीरे-धीरे लंगड़ाते हुए भाग रहा था । चीते ने दौड़ कर हिरण पर हमला कर दिया और उसे मार दिया । सभी जानवर खुशी से चिल्लाने लगे । अब वे सभी हिरण को खाने के लिए उत्सुक थे । तभी लोमड़ी बोली, `मित्रों, आज की रात कार्तिक पूर्णिमा की रात है । इस दिन बिना स्नान किए भोजन नहीं करना चाहिए । मैंने तो सुबह ही स्नान कर लिया था । मैं यहां हिरण के शरीर की देखभाल करती हूं तब तक आप सब स्नान कर आइए । फिर सब भोजन करेंगे ।`

सभी जानवर लोमड़ी की बातों पर विश्वास करके नदी में स्नान करने चले गए । कुछ देर बाद चीता, लोमड़ी के पास आया । उसने देखा कि लोमड़ी मृत हिरण के पास उदास बैठी है । उसे उदास देख कर चीते ने पूछा, `प्रिय लोमड़ी, इतनी उदास क्यों दिखाई दे रही हो ?`

लोमड़ी बोली, `प्रिय चीते, यह हमारे लिए शर्म की बात है । वह छोटा सा चूहा यह कह रहा है कि यदि वह चुपचाप हिरण के पैर पर नहीं काटता तो हम हिरण को मार नहीं सकते थे। इसलिए यह हिरण उसे ही खाने को मिलना चाहिए। इसे अपने पर बहुत घमंड हो गया है ।`

लोमड़ी की बात सुनकर चीता बोला, `ओह, यह तो सचमुच बहुत बुरी बात है कि मैं एक चूहे के साथ अपना शिकार बांटू । मैं इस चूहे के साथ खाने की अपेक्षा शिकार को छोड़ना अधिक पसंद करूंगा ।` ऐसा कह कर चीता गुस्से से वहां से चला गया ।

थोड़ी देर के बाद चूहा वहां आया । उससे लोमड़ी ने कहा, `तुम मेरे सच्चे मित्र हो ! मैं यहां तुम्हें सावधान करने के लिए बैठी हूं । नेवला यहां आएगा और तुम्‍हें इस हिरण का मांस चखने के लिए कहेगा I असल में वह यह देखना चाहता है कि कहीं यह मांस जहरीला तो नहीं है।`

लोमड़ी की बात सुन कर चूहा झट से वहां से भाग गया और अपने बिल में जा छिपा । थोड़ी देर में भेड़िया भी वहां अपने हिस्से का मांस खाने के लिए आ गया । लोमड़ी ने उससे कहा, `प्रिय भेड़िये, मैं बहुत चिंतित हूं I अभी-अभी चीता यहां आया था I उसने मुझसे कहा कि मैं आपको आपके परिवार के साथ यहां ले आऊं । यह आदेश देकर वह अपनी पत्नी व बच्चों को लेने गया है । अभी शीघ्र ही वह यहां आने वाला है । उसकी पत्नी की आपके तथा आपकी पत्नी व बच्चों के दिलों को खाने की इच्छा है । मैं आपसे निवेदन करती हूं कि उसके यहां आने से पहले आप यहां से किसी सुरक्षित स्थान पर चले जाइए ।`

लोमड़ी की बातों पर विश्वास करके भेड़िया वहां से तुरंत दुम दबा कर भाग खड़ा हुआ । उसने पीछे मुड़ कर भी नहीं देखा ।

भेड़िये के जाते ही नेवला भी वहां स्नान करके आ गया । वह भी हिरण के मांस का स्वाद चखने के लिए आतुर था । लोमड़ी ने नेवले से कहा, `मैंने चूहे को उठाकर हवा में उछाला, वह जमीन पर गिरते ही मर गया I मैंने भेड़िए को उसकी पूंछ में पकड़ कर घुमाया और उसके सिर को पत्थर पर दे मारा । पत्थर से टकराते ही उसकी मृत्यु हो गई । मैंने चीते को युद्ध के लिए ललकारा । मुझसे युद्ध हारने के बाद वह अपनी जान बचाने के लिए यहां से भाग गया । अब तुम्हारी बारी है । क्या तुम तैयार हो ?` लोमड़ी की बात सुन कर नेवला डर गया । उसके मुंह से एक भी शब्द नहीं निकला । वह वहां से तुरंत भाग गया ।

सभी जानवरों के चले जाने के बाद लोमड़ी निश्चिंत होकर आराम से अकेले ही हिरण का मांस खाने लगी ।

इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि बुद्धि के सदुपयोग से और आत्मविश्वास से ताकतवर को भी हराया जा सकता है I

 

(स्वर : श्री सतेंद्र दहिया )
    

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