राजभाषा विभाग

Department of Official Language
गृह मंत्रालय, भारत सरकार

 प्रसिद्ध लघु कहानियाँ
+ रविंद्रनाथ टैगोर
+ प्रेमचंद
+ जयशंकर प्रसाद
+ यशपाल
+ चंद्रधर शर्मा गुलेरी
+ सआदत हसन मंटो
+ फणीश्वरनाथ रेणु
+ निर्मल वर्मा
+ नागार्जुन
+ जैनेन्द्र कुमार
+ यशपाल
+ भीष्म साहनी
+ महीप सिंह
+ सुदर्शन
+ कृष्णा सोबती
+ सुभद्रा कुमारी चौहान
+ पंचतंत्र की कहानियाँ
- डॉ दिनेश चमोला
   नाग का उपकार
   प्रेम का प्रतिदान
   चोर की दाढ़ी में तिनका
   उपकार का बदला
   गोमती का उपकार
   करनी का फल
   बूढ़ा पीपल और मोहिनी
   चूहे जी का चमत्‍कार
   चम्‍पा का राजकुमार
+  डॉ प्रियंका सारस्वत(संपादक)
प्रेम का प्रतिदान

किसी सुंदर रेगिस्तान में एक ऊंट रहता था I उसका नाम था भीरू I  वह बहुत सुंदर था I  अपनी सुंदरता तथा सदव्यवहार के लिए पूरे रेगिस्तान में चर्चित था I  उसके दो बच्चे थे -नीमा और नीरू I  भीरू का परिवार जीव-जंतुओं के लिए हर क्षेत्र में मार्गदर्शन का केंद्र बिंदु था छोटे-बड़े जीव-जंतु हर कार्य करने से पहले भीरु की सलाह अवश्य लेने आते I भीरू के प्रति सभी के मन में अत्यंत स्नेह व आदर था I

रेगिस्तान में बबूल की कटीली झाड़ियां दूर दूर तक फैली हुई थी I   बच्चे घर-आंगन में खेलते रहते तो भीरू दूर चारे की खोज में निकल पड़ता I बच्चों की मां कोमल-कोमल टहनियां तोड़कर बच्चों को खिलाती रहती I  ऊंट जितना बड़ा था उतना ही छोटे जीव-जंतुओं से उसे बहुत स्‍नेह था I  एक दिन जब वह चारे की खोज में दूर निकल गया तो उसे एक बड़ा बबूल का पेड़ दिखाई दिया I उसने सोचा अवश्य उस पर किसी जीव-जंतु का बसेरा होगा I  जैसे ही वह उसके समीप गया तो देखा, पेड़ फूल-पत्तियों से भरा हुआ है I  जब उसे कोई न दिखाई दिया तो उसने ज़ोर से पूरे पेड़ को हिलाया I पेड़ पर मधुमक्खियों का बहुत बड़ा छत्ता था I  वे एकाएक आए भूचाल को देख कर कांप गईं I  जब उसने ऊपर छत्‍ता देखा तो उसे बहुत दु:ख हुआ । उसने प्रेम से कहा- मधुमक्खी बहन, नमस्ते I मैं देखना चाहता था कि इस पेड़ पर कौन से जीव रहते हैंI कम-से-कम हमें अपने आस-पड़ोस की जानकारी होनी चाहिए ताकि एक-दूसरे के सुख-दु:ख में काम आ सकें I

`नमस्ते भैया, आप कितने महान हैं I यह आपने हम पर बहुत बड़ी कृपा की है कि हम नन्‍ही सी मधुमक्खियों से मिलने चले आए... हम धन्य हैं I` कहते ही मधुमक्खियों का झुंड निचली शाखा पर आकर गुनगुनाने लगा I

`अच्छा बहनों ! तो अब चलूँ I पास ही के गोवर्धन मंदिर के समीप मेरा घर है I  देर हो गई है I मेरे बच्चे- नीमा व नीरु मेरी प्रतीक्षा करते होंगे I अच्छा, आप कभी आना भगवान की वाटिका में कई कई प्रकार के फूल खिलते हैं- तुम्हें भी अच्छा लगेगा और हमें भी...I` कहकर भीरू ऊँट जाने लगा I

`तो ठहरो ना भैयायह लो अपने नीरु व नीमा के लिए हम नन्‍ही-सी मधुमक्खियों का छोटा-सा उपहार तो लेकर जाओ I` कहकर मधुमक्खियों की रानी नीरा ने भीरू को शहद की सुन्‍दर-सी थैली थमा दी I भीरू मुंह में शहद की थैली लटकाए खुशी-खुशी घर लौट आया I

जब भीरू ने घर जाकर मधुमक्खियों की बात अपने परिवार को बताई तो वे खुशी से झूम उठे I  दूसरे दिन मधुमक्खियों का पूरा समूह इनके घर आया I  इन्होंने उन्‍हें मंदिर के प्रांगण में खिली पुष्प वाटिका दिखाई I  उनका खूब आदर किया I  अब वे अत्यंत गहरे मित्र बन गएI किसी भी दिन एक-दूसरे से मिले बिना नहीं रहते I

इधर जंगल के चापलूस जानवर उनकी बढ़ती मित्रता व प्रतिष्ठा से जलने लगे जिसमें सबसे प्रसिद्ध थे नीलू लोमड़ी और सफेद भालू I  कई दिनों से एक शिकारी उस जंगल में शिकार करने आया करता था I एक दिन नीलू लोमड़ी ने शिकारी से कहा-

`शिकारी भैया, आप रोज बिना शिकार किए लौट जाते हो, मुझे बहुत बुरा लगता है I यदि मैं आपको हिरणों की बात बताऊं तो क्या आप मान जाओग?`

`बताओ, बहन ?` शिकारी ने हितैषी लोमड़ी की बात सुनते हुए कहा I

`देखो भैया, भीरू नामक एक ऊंट है, जो सभी जीव-जंतुओं का रक्षक है I यदि आप एक बार उसके परिवार की हत्या कर दो तो मैं तीन पीढ़ियों तक का शिकार आप को दिलवा दूँ  उसके बाद जीव-जंतुओं की सारी जानकारी केवल मुझे ही है I`  नीलू लोमड़ी ने बहुत अपनापन जताते हुए कहा I

`यह करना तो मेरे लिए बाएं हाथ का खेल है I तो बताओ कब करू?`  शिकारी ने कहाI

`कल से I विलंब करना तो मूर्खता होगी I` लोमड़ी ने यह कहकर समय व स्थान निर्धारित किया ।

उस रात बहुत भयंकर तूफान आया और मधुमक्खियों के छत्ते वाला पेड़ गिर गया I  कई मधुमक्खियां मर गईं I  भीरू ने अपने घर के पास उनका नया घर बसवा दिया I  जैसे ही रात हुई तो भीरू के घर से बंदूक की गोलियों की आवाज सुनाई दी I  मधुमक्खियों ने अचानक सुना तो भीरू के बच्चे की रोने की आवाज सुनाई दी I  वे पूरे समूह के साथ भीरू के घर की ओर उड़ चलीं तो देखा शिकारी गोली का निशाना दाग रहा था व लोमड़ी निर्देश दे रही थी I  उन्‍होंने आव देखा ना ताव, वे सभी शिकारी व लोमड़ी पर टूट पड़ीं और चंद मिनटों में उन्हें वहीं ढेर कर दिया I  जब घर में गई तो भीरू का परिवार डर के मारे कांप रहा था I  नीरा बहन ने कहा- `भैया, डरो नहीं, हमने उनका अंत कर दिया हैI`  यह सुन कर भीरू की आंखें भर आईं I  कुछ मधुमक्खियां जड़ी-बूटियों का रस ले आईं और बच्चों के घावों पर लगाने लगीं I  भीरू और उसकी पत्नी नन्‍ही-नन्‍ही मधुमक्खियों के प्रेम व मित्रता को देख रुआंसे हो गद-गद हो रहे थे I

 

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(स्वर : श्री सतेंद्र दहिया )
    

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