राजभाषा विभाग

Department of Official Language
गृह मंत्रालय, भारत सरकार

 प्रसिद्ध लघु कहानियाँ
+ रविंद्रनाथ टैगोर
+ प्रेमचंद
+ जयशंकर प्रसाद
+ यशपाल
+ चंद्रधर शर्मा गुलेरी
+ सआदत हसन मंटो
+ फणीश्वरनाथ रेणु
+ निर्मल वर्मा
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+ जैनेन्द्र कुमार
+ यशपाल
+ भीष्म साहनी
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+ सुदर्शन
+ कृष्णा सोबती
+ सुभद्रा कुमारी चौहान
+ पंचतंत्र की कहानियाँ
- डॉ दिनेश चमोला
   नाग का उपकार
   प्रेम का प्रतिदान
   चोर की दाढ़ी में तिनका
   उपकार का बदला
   गोमती का उपकार
   करनी का फल
   बूढ़ा पीपल और मोहिनी
   चूहे जी का चमत्‍कार
   चम्‍पा का राजकुमार
+  डॉ प्रियंका सारस्वत(संपादक)
उपकार का बदला

एक बरगद के पेड़ पर कई प्रकार के पक्षियों का बसेरा था I वसंत ऋतु में बरगद हरे भरे पत्तों से लद जाता तो सभी पक्षी अपने संगीत संसार में जुट जाते I वहां सभी आपस में प्रेम से रहते थे I अपने ऊपर इतने सुंदर-सुंदर पक्षियों के डेरों को देख बूढ़ा बरगद  गौरव से फूल जाताI दिन होते ही पक्षी चारे की खोज में नीले आकाश में उड़ारी भर देते तो उनके नन्हे-नन्हे प्यारे-प्यारे रंग-बिरंगे बच्चे बरगद की जटाओं में झूलते रहते I इस बरगत के पेड़ की सुंदरता व पक्षियों की एकता पूरे वन प्रांत में प्रसिद्ध थी I

एक बार शिकारी क्रूर बाज को जंगल के बरगद के पेड़ का पता चला बस, क्या था I वह मन ही मन फूला न समाया I अब जब पक्षी चारे की तलाश में दूर गए होते तो बाज घात लगाकर उनके बच्चों पर हमला कर देता I वह प्रतिदिन आठ-दस बच्चे मार कर ले जाता I शाम को दाना लेकर उनके माता-पिता लौटते तो अपने बच्चों को न पाकर बहुत निराश होते I जब यह क्रम कई दिनों तक चला तो सभी दुखी हो गए I कुछ ने अपना बरगद का आवास छोड़ दिया I एक दिन सभी पक्षियों ने इस विषय में बैठक की I अलग-अलग पक्षियों ने अलग-अलग रूप में अपने विचार प्रस्तुत किए I वृद्ध व विद्वान कबूतर ने कहा-

`मित्रों, दुष्ट को उसके कुकृत्यों की सजा बदले से नहीं अपितु उपकार से देनी चाहिए I इसको मैं आप को कल सिद्ध कर दिखाऊंगा I`

कबूतर बहुत विद्वान व तांत्रिक था I इसलिए कई-कई बहेलिए उसके संकेतों पर अपना शिकार करते थे I उसने रात को ही उसे व पूरे बाज परिवार को सता-सता कर पिंजरे में बंद करने के लिए कहा I सुबह होने पर बहेलिया ने ऐसा ही किया I कबूतर ने अपनी तंत्र शक्ति से बहेलिए को इसके लिए बहुत धन दिया I वह प्रसन्न हुआ I बहेलिए ने बाज के पूरे परिवार को पिंजरे में उलटा लटका दियाI वह अपनी दुष्टता को याद कर रो रहा था I कबूतर ने सभी पक्षियों को पास के जंगल में पेड़ों पर छिपने के लिए कहा और स्वयं पिंजरे के पास जाकर उससे पूछने लगा-

`मित्! क्यों रो रहे हो ?`

`पक्षी मित्र ! मैंने जीवन भर बहुत पाप किए हैं I इसलिए बहेलिए के पिंजरे में तड़प रहा हूं I मैंने बहुतों के परिवार नष्ट किए हैं I यदि कोई मुझे इस से मुक्त कर दे तो मैं उनका आजीवन ऋणी रहूंगा I`

`ठीक है, मित्र ! तो यह लो !` कहते ही उसने अपनी तंत्र शक्ति से पिंजरे से उसे मुक्त कर दिया I

बाहर निकलते ही बाज परिवार उसके सामने हाथ जोड़ कर रोने लगा I उनकी आंखों से टप-टप आंसू बह रहे थे I बाघ ने कहा, `हे मेरे प्राणदाता? आप कौन हैं ?`

`पक्षी मित्र ! मैं वह अभागा कबूतर हूं जिसके आप ने पिछले कई वर्षों से सारे बच्चे मारे हैं, लेकिन संकट में शत्रु के प्राणों की भी रक्षा करना मेरा धर्म है I` यह सुन बाज ने सभी से क्षमा मांगी I उसके बाद बाज बरगद के पेड़ पर उनकी सुरक्षा के लिए दिन-रात डटा रहा I अब सभी प्रेम से आपस में रहने लगे I

 

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(स्वर : श्री सतेंद्र दहिया )
    

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